#61 करो उद्धार (Word pyramid)

#61 करो उद्धार (Word pyramid)

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करो उद्धार


मेरे
किशन
कन्हाई रे
जग में सब
पाले अहंकार
भूले प्रेम दुलार
करो हे प्रभु उद्धार।
हे
राम
जहाँ में
हर ओर
रावण आज
मचाये उत्पात
हो रावण संहार
करो हे प्रभु उद्धार।
हे
भोले
भंडारी
नीलकंठ
दुष्ट संहारी
संकट है भरी
अधर्म को संहार
करो हे प्रभु उद्धार।
हे
शक्ति
स्वरूपा
माता दुर्गा
तेरे भक्तो पे
है संकट भरी
धर रूप विकराल
करो हे माता उद्धार।

विवरण शब्द पिरामिड (Word pyramid)

एक ऐसी रचना जिसमें शब्दों की संख्या एक एक कर बढती है। शब्दों की गणना की जाती है न कि मात्रा की। संयुक्ताक्षर को एक शब्द माना जाता है। लघु एवं दीर्घ शब्द का अन्तर नहीं पडता अर्थात मात्रा भार का असर नहीं मात्र शब्द गणना की जाती है। प्रत्येक पंक्ति अपनी पूर्ववर्ती पंक्ति से एक अधिक शब्द के साथ होती है। इस प्रकार वर्ड पिरामिड की रचना की जाती है। इस वर्ड पिरामिड में एक से लेकर आठ तक शब्द समूह को बाढाया गया है एवं इस प्रकार कुल चार खण्ड में रचना लिखी गई है।

शब्द पिरामिड रचना का प्रथम प्रयास। प्रत्येक खण्ड में शब्द संग्रह 1 से ले कर 8 तक।


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विजय
3 months ago
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राधे राधे ।
वाह क्या बात है।

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jk namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।