#53 स्मृति
poem on memory

#53 स्मृति

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क्यों स्मृति यूँ सताती।
जग में न कोई वैरी दूजा,
पल में रुलाती पल में हसाती,
पल में मजबूर सोंचनें को करती,
हर पल यह एहसास जताती,
क्यों स्मृति यूं सताती।

कहती खुद को जीनें का जरिया,
झील समन्दर से भी गहरी यह दरिया,
बिन घुंघरू बाजे यह झांझर,
चुप रह कर भी शोर मचाती,
क्यों स्मृति यूं सताती।

एक तो ढोल नगाड़े बाजे,
दूजे नामदेव की स्मृति बाजे,
कर देती हर पल हैरान,
काज सकल व्यरथ बेकार बताती,
क्यों स्मृति यूं सताती।

 


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Explanation of the poem on memory

This hindi poem explain the thoughts about the memory as memory hurts the mind and heart by remembering the good and bad happening of the life. Memory always gives the power to maintain the happening and miss-happening in life. Always memory a part of life gives an example to overcome the bad dreams about the miss-happening in life. Memory always stored in mind either in the form of hidden of open mode. Mind stores every moment of life in the form of memory.

Poem on memory

स्मृति पर हिन्दी कविता

Hindi Poem on Memory

Read the hindi poem on memory. स्मृति is the word in hindi expressing the hypothysis of memory. This poem express the thoughts.

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jk namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।