#16-गुण्डागर्दी की तमन्ना

#16-गुण्डागर्दी की तमन्ना

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गुण्डागर्दी की तमन्ना,
अब हमारे दिल में है,
मारना बस मारना है,
खर्चा उनके बिल में है।
वो पैसे देंगे हम मारेंगे,
नहीं रुकेंगे हाँथ हमारे,
नाम होगा देश में तब,
खर्चा देंगे वो सारे।

बीरप्पन जैसे अनेक,
जो नेताओं को तारें,
लालच बस ये होते हैं,
उनके किस्मत के तारे।
देश में आतंक मचाना,
बस इतना ही आता,
पैसा देता यह नेता,
यही राजनीति सिखाता।

राजनीति की चंगुल में,
ये फंस इस कदर जाते,
एक बार पैर जमनें पर,
ये नहीं कभी उबर पाते,
बस मारते हैं मारते,
और मारते रह जाते।


–>सम्पूर्ण कविता सूची<–


हिंदी कविता गुण्डा गर्दी की तमन्ना

इन पंक्तियों के माध्यम से एक दर्पण रख कर प्रतविम्ब को दर्शाने का प्रयत्न किया गया है। देश की युवा पीढी गलत आदर्श मन में रख कर गलत राह में निकलनें को नहीं हिचकती। परन्तु यही पंक्तियाँ समाज की सच्चाई को उजागर करती हैं। समाज इस सच्चाई को झुठला नहीं सकता। सामाजिक सराबोरता इन पंक्तियों को पूरी तरह से बल देती प्रतीत होती है। सामाजिक मतभेद व राजनैतिक लाभ इस प्रकार की प्रवृत्ति को पूर्ण रूप से सहारा देती हैं।

Hindi Poem on Gundagardi

Poem on gundagardi in hindi

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jk namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।