#35-जीवन संघर्ष

Category : hindi poems

कहते हैं कहने वाले कि, जीवन को संघर्ष न मानो,
बहुत कुछ कर सकते हो, तुम अपने को पहचानो,
पहचानूं भला कैसे अपने को, कुछ सुझाया नहीं मुझे,
क्या क्या कर सकता हूं, किसी ने बाताया नहीं मुझे,
बस कही इक बात कि बात दिल की मानो
कहते हैं कहने वाले कि, जीवन को संघर्ष न मानो।

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Jitendra Kumar Namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

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