#5-विज्ञान – एक अभिशाप

(Science: A Curse)

इस दुनिया में रहनें वालों ने, मौत की सेज सजाई,
दिन – प्रतिदिन यह सेज हाँ सुन लो, लेती है अंगड़ाई।
पल – पल हर छण प्रति मानव, करे मौत से लड़ाई,
इस दुनिया में रहनें वालों नें, मौत की सेज सजाई।
एक तरफ इस सेज में सुनलो, मानव करे आराम,
पर एक पल आता है ऐसा, सब हो जाए हराम,
सभी जानते हैं इसे, यह नहीं है गुमनाम,
विज्ञान नाम है इसका, मानव दिमाग है लाई ,
इस दुनिया में रहनें वालों नें, मौत की सेज सजाई।

Author: Jitendra Kumar Namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

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