वास्तविकता

#40-REALITY- भागे तो थे

Category : hindi poems

हम तो तन्हा दूर ही थे तुमसे,
बस दिल में पास आने के अरमान जागे तो थे,
रह गये इतने पीछे हम वक्त,
बेवक्त कदम मिलाने को भागे तो थे ।

बिछड जाने के डर ने जकड रखा था,
डर से निकलने को यूं क्या करता अकेला,
जीत दिल के डर को भांप कर,
समन्दर के उन किनारों को झांके तो थे।
समन्दर की लहरों में ताकत वो थी,
जीतनें को उस डर से भीगे तो थे ।

राहों में यूं बढ कर पीछे रह गये,
दिल में अरमान संग चलने के थे,
कोशते हैं खुद को हम पीछे,
तुम बस थोडा आगे तो थे ।

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About Author

Jitendra Kumar Namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

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