पुलिस क्या है

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पुलिस क्या है

Category : hindi poems

पुलिस वह है जो हर जरूरत मंद के साथ खडी है
परिस्थिति चाहे जैसी भी हो अपनी बात पे अडी है,
बडे से बडा अधिकारी हो या छोटा कर्मचारी,
खुद की आवश्यकताओं को तज है सिर्फ आज्ञाकारी,
हर विषम परिस्थिति जिसमे मानी हो सबने हार,
समाज मे दरिंदगी या गंदगी हर स्थिति में लडी है,
पुलिस वह है जो हर जरूरतमंद के साथ खडी है।

बेदाग से इस पुलिस के चेहरे पे लगे है दाग कभी,
सारी कुर्बानियो को भुला उस दाग के पीछे पड जाते हैं सभी,
क्यो भूल जाते है सब पुलिस वाला भी देश का नागरिक है,
शारीरिक और मानसिक आराम उसका भी हक है,
पर अपने आराम को तज 24 घण्टे तत्पर बात छोटी या बडी है,
पुलिस वह है जो हर जरूरतमंद के साथ खडी है।


About Author

Jitendra Kumar Namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

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