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#21-दृढ बनो

निकला था अलि भ्रमर में अंजानें मंजिल की खोज, दिल में आश लगाए भटके, मन में मंजिल पानें की सोंच,…

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#20.मैं बुन्देलखण्ड हूँ रो रहा।

न देखी किसी ने दशा वो मेरी, बस हंसते रहे मुस्कुराते रहे, मेरी दशा को उथला दिखा, जग को धता…

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#19.happy-holi

इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह जाएगी यह होली। भविष्य में होली के एण्ड्रयड ऐप होंगे, लोग रंग विरंगी…

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#18-गौरैया The sparrow

सुन गौरैया वर्षों पहले मेरा आंगन महकाती थी, मेरा बचपन फुदक तेरे संग, उछल कूद सिखाती थी, डालूं दाना आंगन…

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#17-महिला सशक्तिकरण

महिला दिवस आज की नारी -नारी सशक्तिकरण समाज की कुरीतियों से अब, लड़ना हमनें सीख लिया, फटेहाल समाज का मुह,…

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#16-गुण्डागर्दी

(GUNDAGARDI) गुण्डागर्दी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, मारना बस मारना है, खर्चा नेताओं के बिल में है। वो…

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#15-हमारी आश

राह से गुजरते हर राहगीर से हमनें आश लगाई है। जमाने के शिले नें हमें यूँ हि भटकता छोड दिया,…

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#14-क्यों न लगें बोझ बेटियाँ

माँ बाप की लाडली बेटी, समझदार जब थोडी होती, दुनियादारी का बोझ सर ले, दुनिया को कंधों पे ढोती, आज…

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#13-ऐ प्रकृति मैं तुझे संभालूं

ऐ प्रकृति मैं तुझे संभालूं। हरियाली मैं तुझे संजोऊँ। पीढी दर पीढी घटती जाए, मूढ कहे तू काम न आए,…