मंजिल क्या है

ऐ पवन ! ठहर जरा,
तू हि बता तेरी मंजिल क्या है?
तू कभी सोंचता है, तेरे भाग्य में लिखा क्या है?
ऐ सूरज! तू ठहर जरा,
क्यों तू बार-बार यहां से गुजरता है
तेरी मंजिल कहां छुपी है क्या तुझे पता है
क्यों तू जग रोशन करता है
तू ही बता तेरी मंजिल क्या है
ऐ भौंरे रुक जा तू यहीं पर
क्यों हर पुष्प से आलिंगन करता है
क्या तूनें अपनी मंजिल नहीं चुनी है
सब कहते हैं सबकी मंजिल है,
ऐ भौंरे तू बता, तेरी मंजिल क्या है