#16-गुण्डागर्दी

(GUNDAGARDI)

गुण्डागर्दी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,

मारना बस मारना है, खर्चा नेताओं के बिल में है।

वो पैसे देंगे हम मारेंगे, नहीं रुकेंगे हाँथ हमारे,

नाम होगा देश में, आकर खर्चा देंगे नेता सारे।

बीरप्पन जैसे अनेक हैं, जो नेताओं को तारें,

लालच बस ये सब होते हैं, नेताओं के किस्मत के तारे।

देश में आतंक मचाना, बस इतना ही है इनको आता,

पैसा देता है यह नेता, यह सब इनको राजनीति सिखाता।

राजनीति की चंगुल में है ये फंस इस कदर जाते,

एक बार पैर जमनें पर, ये नहीं कभी उबर पाते,

बस मारते हैं और मारते हैं बस मारते रह जाते।

Author: Jitendra Kumar Namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

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