#27-facebook life- फेसबुक से दूरी

Category : hindi poems

हमने तो फेसबुक से दूरी बना ली थी।
अपने में ही एक महफिल सजा ली थी,
पर दुनिया नें कहा ह्वाट्स ऐप और फेसबुक पर आओ,
छोड कर हमें यू मझदार में चल दिये थे सब अलग,
न आकर देखा कि दुनिया ने हमसे अपनी कस्ती फिरा ली थी,
हमने तो फेसबुक से दूरी बना ली थी।

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Jitendra Kumar Namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

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