#3-बखानी-एक परिचय

(Bakhani: An Introduction)

बखानी संग्रह उन बातों का,
जिन बातों को सब जानते हैं,
अच्छा बुरा पहचानते हैं,
फिर भी बातें नहीं मानते हैं।

सुननेे में अच्छी लगती हैं,
अनुसरण करनें को लगती हैं,
पर देख जमाना करते हैं,
दिल की करनें में डरते हैं।

डरते हैं “वो क्या कहेंगे”,
अपने दिल की कब करेंगे
मान के अपने दिल की देखो,
लोग “मिशाल” बतलाते हैं।

साफ स्वच्छ यह आइना है,
सब सम्मुख ही दिखलाता है,
करी शरारत या कोई गलती,
शर-ए-आम बतलाता है।

यदि चाहोगे आगे बढना,
खुली राह दिखलाता है,
यह मनचित्र का संग्रह है,
बखानी जीवन तथ्यों का संग्रह है।

An Introduction

Bakhani is the collection of those things,
Which are known very well by every one,
Understand the right and the wrong,
Even though do not follow the things.

Attractive in listening,
Looks like to follow,
but do as the World want,
Have fear to do as thinking.

Have fear what the World will say,
when will do of think,
do as really think,
“Ideal” the world will say.

Its a clean and clear mirror,
Every thing shows in front,
did any mistake,
It said openly.

If want to go forward,
shows the way openly,
It is the collection of Think-paint,
Bakhani is the collection of Facts of Life.

Originally published - http://www.bakhani.com/hindipoems/bakhani-introduction/

Author: Jitendra Kumar Namdeo

मैं समझ से परे। एकान्त वासी, अनुरागी, ऐकाकी जीवन, जिज्ञासी, मैं समझ से परे। दूजों संग संकोची, पर विश्वासी, कटु वचन संग, मृदुभाषी, मैं समझ से परे। भोगी विलासी, इक सन्यासी, परहित की रखता, इक मंसा सी मैं समझ से परे।

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