#18-गौरैया The sparrow

सुन गौरैया वर्षों पहले मेरा आंगन महकाती थी,

मेरा बचपन फुदक तेरे संग, उछल कूद सिखाती थी,
डालूं दाना आंगन में जितने, तू आ के चुंग जाती थी,
मेरे आंगन का पेड सुनहरा, रहता तेरा सुन्दर बसेरा,
सांझ ढले तू भी सो जाती, चहके मन मोहे जब होए सबेरा।

ऐ गौरैया कहाँ गई तू, लौट के आ जा जहाँ गई तू,
बिन तेरे अब आंगन सूना, दुनिया तुझको धता बताती,
मेरा आंगन चहक महक से, तू हर पल बरसाती थी,
सुन गौरैया वर्षों पहले मेरा आंगन महकाती थी।